लोगो का मौताज जमाना, बिखरे कचरे मे खजाना ढुंढते है l भुले बिसरे और कुछ लोग, बिते यादो मे, गुजरा जमाना ढुंढते है | क्योंकी मिटती नही हस्तीं, जिनकी वक्तके मिटानेसेभी, वो लोगोकी दुनिया, वक्तमे सिमटनेके बादभी, दुनिया मे बचे लोग उनका फसाना ढुंढते है |
“आशिकी “
मेरी आशिकी तू है I लेकीन मेरी मंझिल तू नही I मंझिल को ही आशिकी बना लू, इतनी बेवकूफ मैं नही I क्योकी मंझिल रुकती है मिलनेपर, पर आशिकी बढती है होनेपर l