Poem7
Poem8
Poem3
Poem4
Poem5
Poem6
poem1

” मौताज जमाना “

लोगो का मौताज जमाना,
बिखरे कचरे मे खजाना ढुंढते है l
भुले बिसरे और कुछ लोग,
बिते यादो मे,
गुजरा जमाना ढुंढते है |
क्योंकी मिटती नही हस्तीं,
जिनकी वक्तके मिटानेसेभी,
वो लोगोकी दुनिया, वक्तमे सिमटनेके बादभी,
दुनिया मे बचे लोग उनका फसाना ढुंढते है |

“आशिकी “

मेरी आशिकी तू है I
लेकीन मेरी मंझिल तू नही I
मंझिल को ही आशिकी बना लू,
इतनी बेवकूफ मैं नही I
क्योकी मंझिल रुकती है मिलनेपर,
पर आशिकी बढती है होनेपर l